Hello friends, today we have brought you Ajnabi Shayari in Hindi, Ajnabi se Pyar Shayari in Hindi that you will like because here we have provided a collection of the best Ajnabi Shayari 2 Lines in Hindi, Ajnabi Log Shayari in Hindi.

Ajnabi Shayari in Hindi
एक अजनबी यूँ मिला मुझे मेरी पहचान बन गया
रिश्ता कहाँ कोई था उससे, मुझसे मिला मेरी जान बन गया
घुलता रहा वो इस क़दर मुझमें फ़ीकी ज़िन्दगी की मुस्कान बन गया
कुछ अधूरा सा बाक़ी था मुझमें सूनी ज़िन्दगी में लोबान बन गया
उम्र भर चाहा के ज़मीन ओ आसमान हमारा होता
काश कहीं तो ख्वाहिशों का भी कोई किनारा होता
यह सोच के उस मुसाफिर को रोका ही नहीं
दूर जाता ही क्यों अगर वो हमारा होता
हाल पूछने कल फोन किया तो रिंग बजते ही काट दिया
अनजान बनकर आज संदेश भेजा तो फिर घंटो बात किया
अजीब किस्सा है जिन्दगी का अजनबी हाल पूछ रहे हैं
और अपनो को खबर तक नहीं
हम तो यूँ अपनी ज़िन्दगी से मिले अजनबी जैसे अजनबी से मिले
जिस तरह आप हम से मिलते हैं आदमी यूँ न आदमी से मिले
मेरे अजीज ही मुझको समझ न पाए कभी
मैं अपना हाल किसी अजनबी से क्या कहता
न जाने इतनी मोहब्बत कहाँ से आ गयी उस अजनबी के लिए
कि मेरा दिल भी उसकी खातिर अक्सर मुझसे रूठ जाया करता है
अजनबी है वो जिन्हे हम अपना मानते
राज जो दिल में छुपा है उनके ये तो बस खुदा जानते है
अजनबी पर शायरी हिंदी में

तुम्हारा नाम किसी अजनबी के लब पर था
ज़रा सी बात थी दिल को मगर लगी है बहुत
हम कुछ ना कह सके उससे इतने जज्बातों के बाद भी
अजनबी के अजनबी रह गये इतने मुलाकातों के बाद भी
हम तो ख्वाबो की दुनिया में बस खोते गये
होश तो था फिर भी मदहोश होते गये
उस अजनबी चेहरे में क्या जादू था
न जाने क्यों हम उसके होते गये
हर दोस्ती पर अब मुझे शक है
पर क्या करें साला ये ही तो सबके लिए सबक है
अजनबी सी है ये जिंदगी और
वक्त की तेज़ है रफ्तार
रात इकाई, नींद दहाई ख्वाब सैकड़ा
दर्द हजार फिर भी जिंदगी मजेदार
तेरा नाम था आज किसी अजनबी की ज़ुबान पे
बात तो ज़रा सी थी पर दिल ने बुरा मान लिया
मंजिल का नाराज होना भी जायज था
हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे थे
Ajnabi Shayari Attitude in Hindi

दिल की खामोशी से सांसो के ठहर जाने तक
मुझे याद रहेगा वो अजनबी मेरे मर जाने तक
तेरा चेहरा से पता चल रहा है की तुझे किस चीज की उदासी है
लगता है तेरी भी अजनबी राहें अब बस मोहोब्बत की प्यासी है
अजनबी कोई समझ लेता है कोई अन्जान समझ लेता है
दिल है दीवाना हर तबस्सुम को जान पहचान समझ लेता है
तेरी यादो का तो बसेरा है मुझमें कभी
तुम भी आजाना वक़्त रोक कर
मिलने अनजान से जान तक का सफ़र
तो नाप आये हम पर रहना होगा
यहाँ अजनबी बन कर फिरसे
न जाने इतनी मोहब्बत कहाँ से आ गयी उस अजनबी के लिए
की मेरा दिल भी उसकी खातिर अक्सर मुझसे रूठ जाया करता हे
तुम आसमान बन जाना हम आएँगे ज़मीन बन कर
मिलने की ख्वाहिश है फिर से अजनबी बन कर
वो तारों की तरह रात भर चमकते रहे
हम चाँद से तन्हा सफ़र करते रहे
वो तो बीते वक़्त थे उन्हें आना न था
हम यूँ ही सारी रात करवट बदलते रहे
Ajnabi Log Shayari in Hindi

गम के अंधेरे मे खुशी की चिराग ढूंढ़ रही हूँ अकेली हूँ
वाबजूद इसके किसी दुजे साये की तलाश कर रही हूँ
यू हम पर तरस ना दिखाया करो अजनबी
तेरी मेहरबानीयां हमें महंगी पड सकती हैं
मुझे इस बात का गम नहीं कि बदल गया ज़माना
मेरी जिंदगी तो सिर्फ तुम हो कहीं तुम ना बदल जाना
वजह पूछने की मोहलत ही न दी उन्होंने
लहजा बदलता गया और हम अजनबी हो गए
उस मोड़ से शुरू करनी है फिर से जिंदगी
जहां सारा शहर अपना था और तुम अजनबी
दिल ना लगाना कभी अजनबी से, सुन मेरे दोस्त
ऐसी खलिश मिल जाएगी जो उम्र भर की याद बनेगी
कोई अजनबी दिल के लिए ख़ास हो रहा है
अब मुझे मोहब्बत-ए एहसास हो रहा है
Ajnabi se Pyar Shayari in Hindi

इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है
लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर
बदला न अपने आप को जो थे वही रहे
मिलते रहे सभी से मगर अजनबी रहे
वक्त मुशाफिर है चलता ही रहता है
तेरी तरहा किन्ही अजनबी राहों में गुम नहीं हो जाता
हर कदम साथ चलने वाले हम कहीं खो गए
इतने करीब थे हम और अब अजनबी हो गए
जिन्दगी में दो शब्द कहने में काफी मुश्किल होती है
पहली बार किसी अजनबी से हैलो और
आखरी बार किसी अपने से अलविदा
यु न हमे अजनबी करार करो
हम तुम्हारे ही है हमसे प्यार करो
अगर पसंद नहीं है साथ हमारा तो
यूँ किश्तों में बातें करने से भी इंकार करो
Ajnabi Shayari in Hindi for Love
बस तमाम उम्र किसी अजनबी के साथ बितानी है
हर शादी करने वाले की बस इतनी सी कहानी है
सदियों बाद उस अजनबी से मुलाक़ात हुई
आँखों ही आँखों में चाहत की हर बात हुई
अजनबी ख़्वाहिशें सीने में दबा भी न सकूँ ऐसे ज़िद्दी हैं
परिंदे कि उड़ा भी न सकूँ
फूँक डालूँगा किसी रोज़ मैं दिल की दुनिया
ये तेरा ख़त तो नहीं है कि जला भी न सकूँ
अज़नबी किस्से का इक क़िरदार बनकर आ गए
बाज़ार में बाज़ार बनकर
जंगलों का सूखना तो लाज़मी है थे
जो बिक रहे अख़बार बनकर
इस अजनबी शहर में पत्थर कहां से आया है
लोगों की भीड़ में कोई अपना ज़रूर है
साथ बिताए वो पल फिर से भूल जाते है
चल फिर से अजनबी होने का खेल दिखाते है
Ajnabi Shayari 2 Lines in Hindi
अजनबी थे अजनबी रहे इन अजनबियों के शहर में
अजनबी थे, अजनबी रहे इन अजनबियों के शहर में
मुर्शिद पर ये इश्क़ मोहब्बत वाली बातें बर्बाद कर गयी
एक अजनबी से मुझे इतना प्यार क्यों है
इंकार करने पर चाहत का इकरार क्यों है
उसे पाना नहीं मेरी तकदीर में शायद
फिर हर मोड़ पे उसी का इंतज़ार क्यों है
इस ख़ूबसूरत दुनियां में मिलते हजारों लोग
लेकीन हजारों के भीड़ में कोई एक अपना होता है
मंजिल का नाराज होना भी जायज था
हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे थे
अजनबी राहों से पता चला मंजिलों का नाराज होना
वरना कहाँ जानते थे वो किसी की नाराजगी
अजनबी शहर में एक दोस्त मिला
वक्त नाम था पर जब भी मिला मजबूर मिला
अजनबी दुनिया पर शायरी
ओ अजनबी है मेरे लिए पर मेरी हर एक बात मानती है
कोई अपना क्या ख्याल रखेगा मेरा जितना वो रख पाती हैं
तमन्ना मेरी अब उम्मीद लगाये बैठी है
किसी अजनबी से चेहरे को वो अपना बनाये बैठी है
हम ना अजनबी हैं ना पराये हैं
आप और हम एक रिश्ते के साये है
जब जी चाहे महसूस कर लीजियेगा
हम तो आपकी मुस्कुराहटों में समाये है
पलकों को भिगोने लगी है अब तेरी यादें
काश हम अजनबी होते तो ज्यादा अच्छा होता
चला दिल पे खंजर और वो दिल के पार हो गया
एक अजनबी मुलाकात हुई थी उनसे हमारी
मगर ना जाने क्यों उनसे प्यार हो गया
दुखी हूं आज भी दिल से दिल दुखाया उस अजनबी का जबसे
ख्वाहिश तो आज भी है बात करने की मुद्दा तो यही है
अब की कहे कैसे उनसे
You May Also Like😍👇
अजनबी शायरी 2 लाइन
अजनबी जान के क्या नाम ओ निशाँ पूछते हो
भाई हम भी उसी बस्ती के निकाले हुए हैं
ख़ुद को कितना भुला दिया मैं ने
तू भी अब अजनबी सा लगता है
किया है प्यार जिससे हमने जिंदगी की तरह
वो बात भी करते है तो अजनबी की तरह
अगर तुम अजनबी हो तो लगते क्यों नहीं
अगर मेरे हो तो मुझे मिलते क्यों नहीं
जरा सी दोस्ती कर ले जरा सा हम नशी बन जा
थोडा तो साथ दे मेरा फिर चाहे अजनबी बन जा
सदियों बाद उस अजनबी से मुलाक़ात हुई
आँखों ही आँखों में चाहत की हर बात हुई
जाते हुए उसने देखा मुझे चाहत भरी निगाहों से
मेरी भी आँखों से आंसुओं की बरसात हुई
अजनबी रिश्तें पर शायरी
अजनबी बन के हैं लोग आए हुए बज़्म में दोस्त भी सब पराए हुए
बात से बात बढ़ती गई याद की हम इसी याद के हैं सताए हुए
चेहरे अजनबी हो भी जाएं तो कोई बात नहीं
लेकिन रवैया अजनबी हो जाए तो बड़ी तकलीफ देते है
अजनबी कोई समझ लेता है कोई अन्जान समझ लेता है
दिल है दीवाना हर तबस्सुम को जान पहचान समझ लेता है
कोई अनजान जब अपना बन जाता है
ना जाने क्युँ वो बहुत याद आता है
लाख भुलाना चाहो उस चेहरे को
मगर अकस उसका हर चीज़ में नज़र आता है
उसकी हर एक शिकायत देती है मुहब्बत की गवाही
वर्ना अजनबी से कौन हर बात पर तकरार करता है